उज्जैन में घूमने की जगह List 2022| Ujjain Me Ghumne Ki Jagah

दोस्तों घुमने फिरने वाली जगहे आपने बहुत देखी होगी | पर आज मैं आपको ऐसे ही कुछ उज्जैन के बारे में बताने जा रहा हु | जो अपने आप में ही धार्मिक और एतिहासिक स्थल है| तो चलिए जानते है की Ujjain Me Ghumne Ki Jagah, उज्जैन में घूमने की जगह..

उज्जैन में क्या क्या घूमने का है, उज्जैन में कौन कौन से मंदिर प्रसिद्ध है, उज्जैन में कौन सा धार्मिक स्थल है, उज्जैन नगरी में कुल कितने मंदिर हैं, उज्जैन के प्रसिद्ध मंदिर, उज्जैन में टोटल कितने मंदिर हैं आदि धार्मिक स्थलों के बारे में बताने जा रहा हूँ.

महाकालेश्वर जयोतिलिर्ग

हरसिद्धिमातामंदिर

बड़े गणेश जी का मंदिर

इस्कॉन मंदिर

राम मंदिर

कुम्भ मेला

महाकालेश्वर जयोतिलिर्ग

Ujjain Me Ghumne Ki Jagah- भगवान शिव को समर्पित की हुई मदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में है | आस्था और विश्वास से भरपूर ये जगह शिव नगरी के नाम से जानी जाती है | दुनिया भर से लोग यहाँ इस मंदिर के दर्शन के लिए आया करते है | आपको बता दे की सावन महीने में यहाँ भक्तो की  भीड़ देखने को मिलती है | सावन महीने में महाकालेश्वर मंदिर का महत्त्व होता है |

आपको बता दे की शिव जी के 12 ज्योतिलीर्ग में से एक महाकालेश्वर मंदिर में मौजूद है | यहाँ इस मंदिर में एक ऐसा कुंड है जिसे लेकर ऐसा कहा जाता है की कुंड में नहाने से इन्सान के सारे पाप धुल जाते है | इस  पवित्र शहर की यही खास बात है की यहाँ आने वाले लोग को ये अपना बना लेता है | आपको बता दे की ये उज्जैन में घुमने वाली जगहों में से एक है |

महाकालेश्वर ज्योतिलीर्ग मंदिर में आने कुछ मुख्य कारण

भगवान महाकाल की भस्म आरती देखने का सुनहरा मौका हर किसी को देखने को नहीं मिलता है दोस्तों ऐसा कहा जाता है की इस आरती में शामिल होने वालो के सभी दुःख और दर्द दूर हो जाते है | रोजाना सुबह भस्म आरती और महाकाल का श्रृंगार किया जाता है | आपको बता दे की इस प्रकार की आरती आपको उज्जैन जैसे शहर में ही देखने को मिलेगी |

यहाँ पर आरती से पहले यहाँ शिवलिग पर जलाभिषेक किया जाता है | पुरुषो को सिर्फ धोती और महिलायों को साड़ी पहननी होती है | उज्जैन मात्र एक ऐसा शहर है जहा पर आपको स्ट्रीट फ़ूड में फलहारी खाना मिलेगा | Ujjain Me Ghumne Ki Jagah

इसी कारण यहाँ पर ज्यादातर लोग यात्रा के लिए आते है| और इनमे से कुछ ऐसे लोग होते है जिनका व्रत होता है | यहाँ महाकालेश्वर मंदिर में जल चढाने के बद्द ही यहाँ कुछ खाते है | यहाँ आये हुए पर्यटकों का ख्याल रखते हुआ साफ सफाई का ख्याल रखा जाता है |

  • सावन महीने में दूर दूर से लोग महाकाल मंदिर में जाते है |उन दिनों की तुलना सावन महीने में ज्यादा होती है |आपको बता दे की सावन महीने के सोमवार को महाकाल का दर्शन करना शुभ माना गया है | अगर आप उज्जैन में घुमने वाली जगहे में अगर आप यहाँ आना चाहे तो आप एयरोप्लेन ,ट्रेन ,सड़क के रास्तो से भी यहाँ आ  सकते है |Ujjain Me Ghumne Ki Jagah

हरसिद्धि माता मंदिर

इस मंदिर को बारे में बहुत कहानिया है | ऐसा कहा जाता है की महाराज विक्रमादित्य की ये कुलदेवी है | और ये उनकी पूजा किया करते थे | गुजरात के त्रिवेदी परिवार आज भी इनको  कुलदेवी मानकर पूजा किया करते है | जैन धर्म के लोग इनकी प्रति गहरी आस्था रखते है हरसिद्धि माता की कथा ये है की इनकी पूजा भगवान कृष्ण और यादव किया करते थे |

राजा विक्रम आदित्य इनके परम भक्त थे | बार बार अपना सर काटकर माता के चरणों में चढ़ाया करते थे | ऐसा राजा ने 11 बार किया | जब वो बारह बार करने गए तब उनका सर जुड़ा ही नहीं | और उन्होंने अपने जीवन को वही समर्पित कर दिया ऐसा कहा जाता है | आज भी माता की आरती शाम को होती है | और सुबह के समय में गुजरात में होती है |

बड़ा गणेशजी का मंदिर (Ujjain Me Ghumne Ki Jagah)

दुनिया भर में गणेशजी का बहुत मंदिर देखा होगा आपने लेकिन आज मैं आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहा हु की शायद ही आप जानते होंगे, इस मंदिर को बड़ा गणेश के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है | इस मंदिर की खास बात ये है की गणेशजी की मूर्ति विश्व के प्रतिमाओ में से एक है | ये मूर्ति सीमेंट से नहीं बल्कि मसालों से बनी हुई है |

तो आइये  अब हम इस मंदिर के बारे में जानते है. जानकारी के अनुसार इस मंदिर की स्थापना महर्षि गुरु महाराज सिधांत वागेश पंडित नारायण व्यास ने करवाई थी | इस मंदिर के बारे में जानकर आपको हैरानी होगी की इसमें गुड और मेथी के दानो का प्रयोग किया गया है |

इस मूर्ति को बनाने में पवित्र स्थलों से लाई हुई जलो को भी मिलाया गया है | इसमें मथुरा, कांची, उज्जैन, काशी, हरिद्वार जैसी जगहों से मिटटी मिलाई गयी है | इस मंदिर को बनाने में ढाई वर्ष का समय लगा था. गणेशजी की मूर्ति 18 फीट उची और 10 फीट चौड़ी है | अगर आप उज्जैन में घुमने वाली जगह में सबसे अच्छा और विशाल मंदिर है |

इस्कॉनमंदिर (Ujjain Me Ghumne Ki Jagah)

दोस्तों, उज्जैन में स्थित इस्कॉन मंदिर जिसे उज्जैन में राधा मदन मोहन मंदिर भी कहा जाता है | भारत राज्य के मध्यप्रदेश में उज्जैन मेंखेदा बस स्टैंड के पास है | उज्जैन भारत के तीर्थस्थलो में एक है | आपको बता दे की इस मंदिर को 2006 में खोला गया था | इसे मकराना शहर संगमरमर से बनाया गया था | मकराना राज्यस्थान में स्थित है |

आपको बता दे की इसका इस्तेमाल ताजमहल के निर्माण में भी किया जाता है| ये मंदिर उज्जैन में एक मात्र इस्कॉन संगठन सौर उर्जा संचालित मंदिर है | यहाँ भगवान श्री कृष्ण के इर्द गिर्द में घुमने वाले कई सारे त्यौहार मनाये जाते है |

 राममंदिर

Ujjain Me Ghumne Ki Jagah- दोस्तों राम मंदिर के बारे में आप जानते ही होंगे पर | ये मैं अयोध्या की बात नहीं कर रहा हूँ, मैं उज्जैन में बना राम मंदिर के बारे में बात कर रहा हूँ, दोस्तों तो चलिए अब हम राममंदिर उज्जैन के बारे में जानते है.

शहर में भवगान राम से चार सबसे पुराने प्राचीन मंदिर है | 800 से 300 साल पुराने, इन मंदिरों में नियमित पूजा और अर्चना की जाती है | एक श्री कृष्णा की मंदिर भी है | जिसकी प्रतिमा हजारो साल पुरानी है |

दाढ़ी मुछ वाले श्रीराम

बुढा मंदिर कार्तिक चौक में श्री राम की पूजित सबसे पुरानी प्रतिमा है | ये मंदिर की प्रतिमा 800 साल पुरानी है | इस मंदिर में  भगवान बनवासी के रूप में दर्शन होते है | पुजारी महंत ओमप्रकाश निवार्नी के अनुसार मंदिर में सेवा देने वाले 37वी पीडी के पुजारी है | उनका ऐसा मानना है की श्री राम के सावले काले पत्थर देश में दूसरी  प्रतिमा है |

एक प्रतिमा नासिक एक राम मंदिर में है | प्रतिमाओ में राम ,लक्ष्मण ,और सीता वनवासी रूप में है |अहिल्या द्वारा बनाया गया मदिर उज्जैन में इसीलिए है की उस समय ये जगह महिदपुर में आता था | जो होलकर राजवंश के अधीन था | यहाँ रामसीता चलते हुए दिखाई देते है.

सराफा में स्तिथ रामजी की गली में मध्यकालीन में बना राम मंदिर है | आपको बता दे की पुजारी गुरु आशीष गुरु के अनुसार मंदिर में संगमरमर की प्रतिमा आकर्षक है | Ujjain Me Ghumne Ki Jagah

कुम्भ मेला

दोस्तों, आपको बता दू की कुम्भ मेले का इतिहास 850 साल पुराना है | ऐसा कहा जाता है की इसकी शुरूआत शंकराचार्य ने की | लेकिन कुछ कथाओ के अनुसार इसकी शुरूआत पहले ही हो गयी थी, ऐसा कहा जाता है की एक बार महर्षि दुवार्षा के श्राप के कारण जब इंद्र और देवता कमजोर पड़ गए तब राक्षस ने देवतावो पर हमला करके पराजित किया | तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुचकर हमले की बात बताई |

तब भगवान विष्णु ने कहा की छीर सागर का मंथन करके अमृत निकलने की बात कही, अमृत कलश पर अधिकार ज़माने के लिए देव और दानव में 12 दिनों तक युद्ध होता रहा | आपको बता दे की अमृत का कलश हरिद्वार, इलाहाबाद, उज्जैन और नासिक के स्थानों पर गिरा था, इसीलिए इस चार स्थानों पर ही कुम्भ का मेला तीन साल में एक बार लगता है |

आपको बता दे की 12 साल बाद ये मेला अपने स्थान पर वापस पहुचता है, जैसे पहला मेला हरिद्वार में, तो दूसरा मेला 3 साल बाद उज्जैन, नासिक ऐसे करके अपने स्थान पर पहुचता है.

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार जब ब्रस्पति कुम्भ के राशी और सूर्य के राशी में मेष प्रवेश करता है तो तब कुम्भ के मेले को आयोजित किया जाता है दोस्तों, भारत में कुम्भ मेले को विश्वास का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है, इस पर्व को मानने के लिए देश के साथ साथ विदेश के लोग भी इस पर्व को मनाने आते है |

और कुम्भ के मेले की पवित्र नदियों में आस्था की डूबकी लगते है, यहाँ इस पर्व को देखने के लिए बहुत भक्त और लोगो की भीड़ देखने को मिलती है.

इस कुम्भ का मेला देश और दुनिया में प्रख्यात है दोस्तों, क्युकी कहते है हमारा भारत महान है. अगर आप उज्जैन में घुमने वाली जगहों के बारे में हमारा आर्टिकल अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों में भी शेयर करे.

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