सोयाबीन की खेती कैसे करे | – Soyabin Ki Kheti Kaise Kare?

सोयाबीन की खेती कैसे करें काफी सारे लोग ऐसे हैं जो स्वास्थ्यवर्धक अर्थात अधिक प्रोटीन और कैलोरी वाले पदार्थों का उपयोग करते हैं और अगर अधिक प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के बारे में बात की जाए तो सोयाबीन का नाम सबसे आगे आता है कि सोयाबीन में 44% तक प्रोटीन होता है। इसके अलावा इससे जुड़े इंडस्ट्री की बात करें तो सोयाबीन से तेल निकाला जाता है और सोयाबीन के तेल हमारे देश में काफी डिमांड है जिसकी वजह से सोयाबीन की खेती पर खाद्य तेल इंडस्ट्री भी निर्भर करती है।

शायद यही कारण हैं कि सोयाबीन उगाने वाले किसानों को देश मे अच्छे दाम मिलते हैं। अगर आप भी सोयाबीन की खेती करना चाहते हैं और सोयाबीन की खेती करके अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हो तो आपको पता होना चाहिए कि आधुनिक अर्थात को उन्नत तरीको से सोयाबीन की खेती खेती कैसे करते हैं।

अगर आप सोयाबीन की खेती में रुचि रखते हो और आपको सोयाबीन की खेती कैसे करे? के बारे में नही पता तो यह लेख पूरा पढ़े क्योंकि इस लेख में हम सोयाबीन की खेती से जुड़ी पूरी जानकारी स्टेप बाई स्टेप देने वाले हैं।

सोयाबीन की खेती कैसे करे ?

जमीन की कितनी वर्तमान में हमारे देश में कई इलाकों में जैसे कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में पैदा होता है। दुनिया में सबसे अधिक से अधिक अमेरिका में पैदा होता है और भारत का नाम एवं देशों में है जहां काफी मात्रा में सोयाबीन का उत्पादन किया जाता है और सोयाबीन से जुड़ी हुई इंडस्ट्री मौजूद है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि सोयाबीन की खेती काफी फायदेमंद है लेकिन इसमे हमे मेहनत भी काफी करनी होती हैं, अर्थात व्यक्तिगत बल आपको देना होगा। इसके अलावा सोयाबीन की फसल को अच्छी खासी देखभाल की जरूरत भी होती हैं।

बीजो का उपचार 

बीजो का उपचार सोयाबीन के अंकुरण को बीज (बीमारियाँ) प्रभावित करती हैं. हमें इसकी रोकने के लिए बीज को थीरम या केप्टान 2 ग्राम काबेंडाजिम या थायोफेनेट मिथाइल 1 ग्राम मिलकर पर किलो ग्राम बीज की दर से उपचार करना जरुरी होता है. या फिर ट्राइकोडरमा 4 ग्राम और काबेंडाजिम 2 ग्राम बीज से उपचार करके जरुर बोएँ.

सोयाबीन की खेती के लिए कैसी भूमि चाहिए 

सोयाबीन की खेती के बारे में खास बात यह है कि इसे कुछ विशेष भूमि जैसे कि हल्की रेतीली या फिट हल्की मृदा वाली भूमि को छोड़कर लगभग सभी भूमि पर उगाया जा सकता है। लेकिन अगर किसी भूमि में पानी की निकास को सुविधा हो और वह चिकनी दोमट हो तो उस पर सबसे बेहतरीन और गुणवत्ता के साथ सोयाबीन की खेती की जा सकती है, अर्थात इस प्रकार की मिट्टी और खेत सोयाबीन की खेती के लिए सबसे उपयोग माने जाते हैं।

इसके अलावा जिन खेतों में पानी रुक जाता हैं उनमें यह खेतो नही की जा सकती हैं। भुरभुरी मिट्टी और ढेला रहित खेत सोयाबीन की खेती के लिए श्रेष्ठ होते हैं। अगर जमीन को तैयार करने की प्रोसेस के बारे में बात की जाए तो ग्रीष्मकालीन समय में सोयाबीन की खेती के लिए 3 वर्ष में कम से कम एक बार खेत को जरूर जोतना चाहिए।

इसके अलावा वर्षा प्रारंभ होने से पहले अर्थात मानसून का सीजन आने से पहले खेतों में दो से तीन बार बखर या पाटा चलाया जाता है जिससे कि खेत तैयार हो सके। यह काम मुख्य रूप से वसंत ऋतु में किया जाता है जब सर्दी और गर्मी दोनों कम होती है और मौसम सुहावना रहता है। 

जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि ढेला रहित और भुरभूरी मिट्टी वाले खेत इस तरह की खेती के लिए सबसे बेहतर माने जाते हैं। लेकिन अगर किसी अन्य प्रकार के भी खेत में सोयाबीन की खेती की जानी है तो उसमें जल निकास की सटीक व्यवस्था करना आवश्यक होता है।  इससे अधिक उत्पादन होता है किसान बेहतर प्रॉफिट प्राप्त करने में सक्षम हो पाता हैं।

आखरी बखरनी और पाटा समय से करना होता हैं, जिससे पहले से मौजूद खरपतवार और अंकुरित खरपतवार से बचा जा सकता है।

सोयाबीन की खेती के लिए बुआई कैसे करे?

अगर आप सोयाबीन की खेती करना चाहते थे इसके लिए आपको यह भी पता होना चाहिए कि सोयाबीन की खेती के लिए उन्नत तरीकों से बुवाई कैसे की जाती है। इसके लिए सबसे पहले आपको बीजों के बारे में जानना जरूरी है तो बता दे की सोयाबीन के बीज 3 तरह के होते हैं जिनमे से एक छोटे और एक बड़े और एक मीडियम साइज के होते हैं। इनमें से छोटे दाने वाले बीज 1 हेक्टेयर के लिए 70 किलोग्राम, मध्यम दाने वाले बीज 80 किलोग्राम, बड़े दाने वाले बीज 100 किलोग्राम चाहिए होते हैं।

सोयाबीन के बीज बोने का मुख्य समय जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के पहले सप्ताह तक होता है। यह समय बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त और श्रेष्ठ माना जाता है। बीच के बेहतरीन अंकुरण के लिए एक भूमि में कम से कम 9 से 10 सेंटीमीटर की गहराई में नमी होना आवश्यक होता है। अगर बुवाई करने में थोड़ी सी देरी हो जाए तो अधिक उत्पादन के लिए बीजों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

लेकिन अगर समय के साथ और उपयुक्त समय पर ही बीज बो दिए जाए तो कम लागत में ही बेहतरीन प्रॉफिट प्राप्त किया जा सकता है। Soyabin Ki Kheti Kaise Kare

सोयाबीन के बीजों की बुवाई कतारों में की जाती है। इसमे कतारों की दूरी बोनी किस्म के बीजों के लिए 30 सेंटीमीटर और बड़ी किस्म के बीजों के लिए 45 सेंटीमीटर मानी जाती हैं। बेहतरीन उत्पादन और सटीकता के लिए 20 कतारों के अंतराल से कुड़ जल निथार और नमी संरक्षण के लिए जगह खाली छोड़नी चाहिये। बीजो को 2.5 से लेकर 3 सेंटीमीटर तक कि गहराई पर बोना होता हैं। इसके अलावा अगर बेहतरीन उत्पादन चाहिए तो बीज और खाद को अलग अलग बोना चाहिए जिससे कि अंकुरण क्षमता पर कोई नकारात्मक प्रभाव ना पड़े।

सोयाबीन की खेती में सिचाई कैसे करे?

क्योंकि सोयाबीन की खेती खरीफ की फसलों में गिनी जाती है तो इसमें मुख्य रूप से सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन अगर खेत में पर्याप्त नमी नहीं हो और विशेष रूप से जब कलियों में दाना भरा जा रहा हो तब खेत में सही नमी ना हो तो सिंचाई की जा सकती है जो पूरी तरह से खेत और खेत में उस समय मौजूद नमी पर निर्भर करती है।

सोयाबीन की खेती में कटाई और गहाई कैसे करते हैं?

सोयाबीन की खेती में सिंचाई के बाद और अन्य कामों जैसे की खरपतवार नियंत्रण आदि के बाद जब फसल पकने लगती हैं तब इसकी कटाई की जाती हैं। सोयाबीन की खेती में जब पत्तियां सूख कर झड़ने लगती है और 10% फलियां सूखकर पूरी हो जाती है तो कटाई की जाती हैं। फसल की कटाई के बाद गटठो को 2 से 3 दिन तक सुखाया जाता हैं और उसके बाद गहाई के माध्यम से दोनों को अलग कर लिया जाता हैं।

थ्रेसर, ट्रेक्टर और बैलों आदि के माध्यम से  यह काम किया जाता हैं। लेकिन अगर बीज की गहाई लकड़ी से पीटकर की जाए तो अधिक और बेहतर उत्पादन कम नुक्सान के साथ प्राप्त किया जा सकता हैं।

सोयाबीन की उन्नत किस्में 

जे. एस-335 :-

यह सोयाबीन की उन्नत किस्म है हम इस प्रजाति के बीज को 85 से 95 दिनों में ही हो जाता है. इस प्रजाति की एक खासियत है की यह बजन में अच्छा होता है इसके 11 से 12 बीजो का बजन 100 ग्राम तक होता है. इस किस्म की उपज की छमता  24 से 29 कुंटल/ हैक्टेयर होता है.

जे.एस. 93-05 :-

इस प्रजाति के बीज 90 से 100 दिनों में ही तैयार हो जाता है. यह प्रति हैक्टेयर में 20 से 25 कुंटल पैदावार होती है. इस प्रजाति के 13 बीज का बजन 100 ग्राम होता है. इसकी मुख्य विशेषताएं अर्द्ध-परिमित वृद्धि किस्म, बैंगनी फूल, कम चटकने वाली फलियां.

एन.आर.सी-86 :-

यह इस प्रजाति के बीज 90 से 95 दिनों में तैयार होता है. और इसके 13 बीजो का बजन 100 ग्राम होता है. और इसकी उपज होने की छमता 20 से 24 कुंटल एक हैक्टेयर मे होती है.

एन.आर.सी-12 :-

यह इस प्रजाति के बीज 90 से 95 दिनों में तैयार होता है. और इसके 13 बीजो का बजन 100 ग्राम होता है. और इसकी उपज होने की छमता 20 से 24 कुंटल एक हैक्टेयर मे होती है. एन.आर.सी-12 की विशेषताएं:- , बैंगनी फूल, परिमित वृद्धि, गर्डल बीटल और तना-मक्खी के लिए सहनषील, पीला.

एन.आर.सी-7 :-

इस प्रजाति के बीज को 90 से 95 दिनों में ही हो जाता है. इस प्रजाति की एक खासियत है की यह बजन में अच्छा होता है इसके 12 से 13 बीजो का बजन 100 ग्राम तक होता है. इस किस्म की उपज की छमता  20 से 25 कुंटल/ हैक्टेयर होता है. इसकी मुख्य विषेषताएं: परिमित वृद्धि, बैंगनी फूल, फलियां चटकने के लिए प्रतिरोधी और गर्डल बीडल.

लोगों के पूछे जाने वाले सबाल-

  • सोयाबीन की खेती कहाँ होती है?
  • सोयाबीन की कटाई किस महीने में होती है?
  • सोयाबीन की फसल में कौन सा खाद डालें?
  • सोयाबीन के बीज में कितना प्रोटीन होता है?
  • सोयाबीन में क्या पाया जाता है?
  • सोयाबीन की उन्नत किस्में बताइए?

लोगो केदवारा  द्वारा पूछे गय सवाल – 

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