अरहर Step by Step- Arhar Dal Ki Kheti Kaise Kare?

अरहर (तुअर) दाल की खेती कैसे करे?

Arhar Dal Ki Kheti Kaise Kare- भारत एक कृषि प्रधान देश हैं और भारत में काफी सारी कई तरह की फैसले उगाई जाती हैं। काफी सारे किसान ऐसे होते हैं जिनके पास जमीने कम होती हैं और उनके पास आय का कोई अन्य स्रोत भी नहीं रहता। ऐसे किसानो को सीमांत किसान कहा जाता हैं और यह किसान मुख्य रूप से अपनी जमीनों पर ऐसी फैसले उगाने की कोशिश करते हैं जो कम लगत में अधिक बेनिफिट देती हो। दलहन की फसलों के मामले में भी कुछ ऐसा ही हैं।

अगर आधुनिक तरीके से खेती की जाये और जमीन योग्य व उपजाऊ हो तो दलहन उगाकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता हैं। भारत में लगभग हर क्षेत्र में दाल और दाल से बनने वाले पदार्थो की डिमांड रहती हैं। फर्क यह हो सकता हैं की किसी जगह पर किसी दाल का ज्यादा उपयोग होता होगा

तो किसी जगह पर किसी अन्य दाल का! अगर जमीं हैं और आप अपनी जमीन पर अरहर अर्थात तुअर की दाल की खेती करना चाहते हो तो यह लेख आपके लिए काफी लाभदायक साबित होने वाला हैं क्युकी इस लेख में हम आपको बताएँगे की आप कैसे घर बैठे हुए अरहर की दाल की खेती कर सकते हो (Tuar/Arhar Dal Ki Kheti Kaise Kare) और अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हो।

अरहर दाल की खेती कैसे करे? Arhar Dal Ki Kheti Kaise Kare

अरहर की दाल की खेती के बारे में एक खास बात यह हैं की आपको ना केवल सीधे तौर पर काफी मुनाफा होगा बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से भी काफी फायदे होंगे। अरहर की दाल की हरी फलिया सब्जी के लिए, खली पशुओ के लिए, हरी पट्टी चारा अदि के लिए काम आ जाती हैं जिससे की इससे अप्रत्यक्ष तौर पर काफी फायदे होंगे। किसी भी अन्य फसल की तरह अरहर की दाल खेती के लिए भी जमीन में कुछ योग्यताए आवश्यक हैं और किसान को इसके लिए मेहनत भी करनी होती हैं।

लेकिन जहा मेहनत होती है वह मुनाफा भी बेहतर होगा। अगर आधुनिक तरीके से खेती की जाए तो कम मेहनत में अधिक मुनाफा भी प्राप्त किया जा सकता हैं। किसी भी अन्य फसल की तरह आपको अरहर की खेती के लिए भी शुरू से प्लानिंग करनी होगी और उसके बाद ही आप बेहतर गुणवत्ता के साथ अच्छीफसल प्राप्त कर सकोगे। अच्छी अरहर की फसल प्राप्त करने के लिए आपको Step-by- Step काम करना होगा।

इस लेख में हम आपको अरहर की फसल उगाने के लिए भूमि की तैयारी से लेकर फसल कटाई तक संपूर्ण जानकारी देंगे! तो चलिए शुरू करते हैं।

अरहर की खेती के लिए कैसी जलवायु चाहिए होती हैं? “Arhar Dal Ki Kheti Kaise Kare”

किसी भी प्रकार की फसल के लिए एक विशेष जलवायु बेहतर रहती हैं। अरहर/तुअर की दाल उगाने के लिए भी एक विशेष जलवायु बेहतर मानी जाती हैं। अरहर की फसल उगाने के लिए 30 से 35 डिग्री सेल्सियस का अधिकतम तापमान और 15 से 18 डिग्री का अधिकतम तापमान सही माना जाता हैं। 600 से 650mm की वर्षा स्तर वाली जमीने अरहर दलहन की खेती के लिए बेहतर मानी जाती हैं। बुआई के लिए 25 से 33 सेल्सियस का तापमान बेहतर माना जाता हैं और कटाई के लिए 35 से 40 डिग्री सेल्सियस का तापमान सही रहता हैं।

अरहर की खेती के लिए जमीन को कैसे तैयार करे? अरहर की फसल के लिए बुआई कब और कैसे करनी होती हैं?

अरहर की खेती के लिए दोमट या फिर अधिक स्फुर वाली भूमि बेहतर मानी जाती हैं। जानकारी के लिए बता दे की अरहर की फसल खड़े पानी को सह नहीं सकती तो ऐसे में खेत में जल निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए। फसल उगाने से पहले 2 से 3 बार खेत में हल या बखर के माध्यम से बुआई करनी होती हैं और जमीन को समतल करना होता हैं। इसके अलावा बेहतरीन उच्च गुणवत्ता वाली फसल के लिए जमीन खरपतवार मुक्त होनी चाहिए।

अरहर की फसल के लिए बुआई कब और कैसे करनी होती हैं? “Arhar Dal Ki Kheti Kaise Kare”

सबसे पहले तो यह कन्फर्म कर दे की बुआई या फिर बिजाई एक ही अर्थ के दो शब्द हैं। ऐसे में आप इन शब्दों को लेकर अपने दिमाग में कंन्फ्यूजन पैदा ना करे। अरहर की फसल को उगाने के लिए सबसे बेहतर समय के लिए एक्पर्ट्स के बिच में एकमत नहीं हैं लेकिन अगर देखा जाये तो यह पूरी तरह से केवल जलवायु पर निर्भर करता हैं। लेकिन मई के दूसरे पखवाड़े से अगर फसल की बुआई शुरू कर दी जाये तो अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता हैं।

अरहर की दाल की बुआई 50 सेंटीमीटर की क़तर बनानी चाहिए और 25 मीटर के फासले पर पौधा लगाना चाहिए। सीड ड्रिल के माध्यम से बज बोये जा सकते है और कम से कम 5 से 10 की गहराई राखी जाती हैं। वैसे तो सामान्य रूप से छींटे बीज बोये जा सकते हैं लेकिन अगर अधिक गुणवत्ता पूर्ण उत्पादन चाहिए और उसके लिए आधुनिक कृषि करनी हैं तो मशीन का उपयोग बेहतर रहेगा।

अरहर दाल की खेती में सिचाई और गुड़ाई कब की जाती हैं

अरहर की फसल में खरपतवार का सही नियंत्रण काफी ज्यादा जरुरी होता हैं। तो ऐसे में जरूरी हैं की खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाये। खरपतवार नियन्तण के लिए पैंडीमैथालीन नियंत्रक को 2 ली. प्रति एकड के हिसाब से 150-200 ली. पानी में डालकर बिजाई से 2 दिन बाद छिड़काव करे। इसके अलावा बिजाई के 3 सप्ताह बाद पहली और 6 सप्ताह बाद दूसरी गुढ़ाई आवश्यक हैं।

अगर बात की जाये सिचाई की तो बिजाई के 3 से 4 सप्ताह बाद पहली सिचाई की जाती हैं और इसके बाद वर्षा के अनुसार सिचाई की जानी चाहिए। ज्यादा पानी देने से झुलस हो सकता हैं। “Arhar Dal Ki Kheti Kaise Kare”

अरहर दाल की फसल की कटाई कब और कैसे की जाती हैं? “अरहर कौन सी फसल है”

अगर पौधे सब्जियों के लिए उगाये गये हैं तो पत्तो और फलियों के हरे होने पर उन्हें काटा जाता हैं और अगर दानो अर्थात दाल के लिए खेती की गयी हैं तो पत्तियों के सूखने के बाद फसल को कटा जाता हैं। अगर थोड़ी देरी हो जाये तो दाल अर्थात बीज खराब हो सकते हैं। इसके बाद पौधों को सूखने के लिए रखा जाता हैं और डंडे आदि के द्वारा गुहै करके दाने अलग किये जाते हैं।

इस तरह से अरहर दाल की खेती की जाती हैं।

लोगों के पूछे जाने वाले सवाल – 

अरहर की खेती कब होती है?

अगर किसान सीधे अरहर का बीज खेत में बोते है तो जब पहली बारिश हो और जून के आखरी सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह में इसे बोया जा सकता है. अगर आप चाहते है की हम इसकी नर्सरी लगायें तो आप अप्रैल या मई में इसकी नर्सरी लगा सकते है जुलाई में आप इसकी रोपाई कर सकते है रोपाई करने सरे अच्छी पैदावार बढती है.

अरहर कौन सी फसल है?

अरहर की दाल को दलहनी फसलो में प्रथम स्थान दिया है. अधिक उपज के लिए वैज्ञानिक विधियों, बीज उपचार साथ में बुबाई करने का सही उपयोग करें.

अरहर की संकर किस्म कौन सी है?

टाइप-21, पूसा-992, उपास-120

पूसा-9, नरेन्द्र अरहर-1, आजाद अरहर-1, मालवीय विकास

अरहर की दाल में क्या पाया जाता है?

दाल खाने के कई फायदे होते है इसमें भरपूर मात्रा में आयरन जिंक और मैग्नीशियम पाया जाता है इससे कई बीमारीयों से छुटकारा मिलता है.

अरहर की दाल में कौन सा प्रोटीन पाया जाता है?

अरहर की दाल में पोटेशियम, प्रोटीन, कैलोरी, सोडियम, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और कई विटामिन , बी12, डी की अच्छी मात्रा पाई जाती है। दाल के सेवन करना बहुत जरुरी है इसके कई फायदे हैं.

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